(Jaipur, Jaipur)
आध्यात्मिक दृष्टि से भारतीय संस्कृति में पूजा-पाठ का विशेष महत्त्व रहा है| यहाँ पूजा को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और आत्मिक शांति का प्रतिक माना गया है | माना जाता है कि सच्चे मन से की गयी भक्ति व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा, धैर्य और आत्मविश्वास बढाती है | इसीलिए पूजा भय से नहीं, बल्कि श्रद्धा और आस्था से करने की बात की गयी है | पंडित विजय शंकर मेहता ने पूजा और भक्ति को लेकर महत्वपूर्ण और व्यावहारिक बातें कही हैं | हम अपने बच्चों को पूजा से जोड़े और उसका सही अर्थ भी बताएं | हमने तो पूजा डर-डरकर की है | एक व्यक्ति दवा करता था कि मैं रात को पूजा करके ही सोता हूँ | किसी ने एक दिन पूछ लिया कि आप रात को पूजा क्यों करते है ? तो उसके कहा, क्योंकि मैं रात के अंधेरे से डरता हूँ इसीलिए डर को दूर करने के लिए पूजा करता हूँ |
अखाड़े में उस्ताद खड़ा हो तो कसरत करते है | हमने पूजा को भी ऐसी ही एक एक्टिविटी बना दिया है | जबकि पूजा कोई एक्टिविटी नहीं है | वह परमात्मा से सीधे बातचीत करने का माध्यम है | इसके लिए कोई मध्यस्थ की जरुरत नहीं है और ना ही किसी तरह का दबाव होना चाहिए |
दुनिया में हर व्यक्ति को किसी न किसी चीज का डर होता है | पूजा डर से नहीं बल्कि, श्रद्धाऔर आस्था से करनी चाहिए | पूजा करने से मन को शांति मिलती है, डर धीरे धीरे कम होने लगती है और व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस मिलता है |
हमारे देश में 80 % बच्चे स्कूल से आते ही मोबाइल मांगते है और घरों में खाना खाते समय भी मोबाइल मांगते है | जिस तरह मोबाइल से मन को व्यस्त रखा जा सकता है, उसी तरह पूजा और प्रार्थना से मन को शांत और सकारात्मक रखा जा सकता है |
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