(India)
सरकार ने बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव पेश किया है, जिससे इस क्षेत्र को अगले पांच वर्षों में लगभग 7.1 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से अपनी पूर्ण क्षमता तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित उत्तर में बताया कि इस कदम से विदेशी निवेशकों के लिए भारत में बीमा कंपनियों की स्थापना सरल होगी, क्योंकि अब उन्हें शेष 26 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए भारतीय साझेदार ढूंढ़ने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे न केवल विदेशी पूंजी का स्थायी प्रवाह बढ़ेगा, बल्कि तकनीकी सहयोग, प्रतिस्पर्धा और बीमा सेवाओं की पहुंच में भी सुधार होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी कंपनी में एफडीआई बढ़ाने का निर्णय उसके प्रमोटर द्वारा पूंजी और सॉल्वेंसी की जरूरतों, तथा भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। इसी के साथ, सरकार द्वारा चलाई जा रही बीमा और पेंशन योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना के तहत कवरेज बढ़ाने के लिए जमीनी स्तर पर बैंकों और स्थानीय प्रशासन की मदद से लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। 1 जुलाई 2025 से पूरे देश के 2.70 लाख ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों में तीन महीने तक चलने वाला ‘वित्तीय समावेशन संतृप्ति अभियान’ भी शुरू किया गया है, ताकि लोगों को नामांकन में सहायता और योजना की जानकारी सुलभ हो सके। इसके अतिरिक्त, वित्तीय साक्षरता बढ़ाने हेतु भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शुरू की गई वित्तीय साक्षरता केंद्र परियोजना के तहत अब तक 2,421 केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं, जो देश भर में वित्तीय जागरूकता को तीन-तीन ब्लॉकों के स्तर पर बढ़ा रहे हैं।