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कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। मुख्यमंत्री बदलाव को लेकर पूछे गए सवाल पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने साफ कहा कि इस विषय में अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान ही लेगा। खड़गे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य संगठन और विधायकों के एक वर्ग में नेतृत्व को लेकर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
खड़गे के बयान के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए पूछा कि यदि राष्ट्रीय अध्यक्ष ही हाईकमान नहीं हैं, तो फिर पार्टी में फैसले कौन ले रहा है। बीजेपी ने इसे कांग्रेस की आंतरिक कमजोरियों और नेतृत्व संकट का उदाहरण बताया, साथ ही कहा कि पार्टी खुद स्पष्ट नहीं है कि उसके भीतर वास्तविक शक्ति किसके हाथ में है।
इस राजनीतिक हलचल के बीच राज्य के गृह मंत्री ने भी मुख्यमंत्री पद को लेकर अपनी महत्वाकांक्षाएं खुलकर सामने रख दी हैं। उन्होंने कहा कि वे हमेशा से इस पद के दावेदार रहे हैं और हालात बदलने पर उनकी दावेदारी स्वाभाविक रूप से मजबूत होती है। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर बढ़ती खींचतान और कई नेताओं की दावेदारी का संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस की यह आंतरिक स्थिति न केवल सरकार की स्थिरता पर असर डाल सकती है, बल्कि विपक्ष को नए मुद्दे भी दे रही है। आने वाले दिनों में हाईकमान क्या फैसला लेता है, इस पर पूरे राज्य की नज़रें टिकी हैं।