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शंघाई में पेश की गई ह्यूमनॉइड रोबोट मोया (Moya) इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पहली नजर में यह किसी इंसान जैसी दिखती है—आंखों की मूवमेंट, सिर हिलाना और हल्की मुस्कान इसे आम रोबोट्स से अलग बनाती है। इसकी खास बात यह है कि इसकी कृत्रिम त्वचा को हल्का गर्म रखा गया है, जिससे इसे छूने पर इंसानी एहसास मिलता है। इंजीनियरों ने इसे इस तरह डिजाइन किया है कि बातचीत के दौरान यह सामने वाले से आई-कॉन्टैक्ट बनाए रख सके और नेचुरल बॉडी लैंग्वेज दिखा सके।
मोया में हाई-टेक कैमरे, सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम लगे हैं, जो सामने खड़े व्यक्ति के चेहरे के भाव पहचानकर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं। इसका एआई मोशन-कैप्चर तकनीक के जरिए शरीर की हरकतों को स्वाभाविक बनाने की कोशिश करता है। हालांकि विशेषज्ञ साफ करते हैं कि मोया भावनाओं को “महसूस” नहीं करती—यह केवल डेटा के आधार पर रिएक्ट करती है, इसलिए गहरी मानसिक स्थिति या जटिल भावनाओं को समझ पाना अभी इसकी सीमा है।
डेवलपर्स इसे खासतौर पर हेल्थकेयर और सर्विस सेक्टर में इस्तेमाल के लिए तैयार कर रहे हैं। बुजुर्गों की देखभाल, अस्पतालों में सहायक भूमिका और अकेले लोगों के लिए कम्पैनियन रोबोट के तौर पर इसकी संभावनाएं देखी जा रही हैं। साथ ही, इसकी इंसानी गर्मजोशी जैसी डिजाइन ने यह बहस भी छेड़ दी है कि भविष्य में लोग मशीनों से भावनात्मक रूप से जुड़ सकते हैं या नहीं।