(India)
इस दल ने लाल ग्रह के वातावरण और सूर्य की रोशनी का इस्तेमाल करते हुए वहां वर्ष 2018 तक यह कारनामा कर दिखाने की योजना बनायी है । यूनिवर्सिटी आफ साउथ हैम्प्टन स्पेसफ्लाइट सोसायटी के छात्रों की यह योजना ‘लेट्यूस आन मार्स ’ मार्स वन द्वारा संचालित एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के अंतिम चरण में पहुंच गयी है । मार्स वन नीदरलैंड का एक गैर सरकारी संगठन है जो मंगल ग्रह पर प्रयोग करेगा। इस परियोजना के लिए चुने गए दस विश्वविद्यालयों में से यूनिवर्सिटी आफ साउथहैम्प्टन स्पेसफ्लाइट सोसायटी की परियोजना को भी तकनीकी रूप एवं लोकप्रियता के लिहाज से व्यावाहारिक पाया गया है । मार्स वन के प्रयोगों के तौर पर प्रतिस्पर्धा जीतने वाले विश्वविद्यालय के योजना संबंधी साजो सामान के साथ 2018 में मंगल पर भेजा जाएगा। यूनिवर्सिटी आफ साउथहैम्प्टन स्पेसफ्लाइट सोसायटी की योजना का मकसद मंगल ग्रह पर एक छोटा ग्रीनहाउस भेजना है जिसमें मंगल ग्रह के वातावरण और सूर्य की रोशनी का इस्तेमाल करते हुए सलाद के पत्ते उगाए जाएंगे । टीम को अब यह मुकाबला जीतने के लिए जनता के वोटों की जरूरत है । परियोजना की प्रमुख सुजेना लुकारोती ने बताया, ‘ अन्य ग्रहों पर रहने के लिए हमें वहां भोजन उगाने की जरूरत है । किसी ने अभी तक ऐसा नहीं किया है और हम इस मामले में पहले होना चाहते हैं । यह योजना तकनीकी रूप से व्यावाहारिक है और काफी महत्वाकांक्षी भी । हम एक अन्य ग्रह पर पहली बार जीवन लाएंगे । ’
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