(India)
एक अग्रेंजी अख़बार के मुताबिक केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने एक बयान में कहा कि पूरे भारत में संस्कृत भाषा अंग्रेजी का स्थान ले सकती है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा, अंग्रेजी भाषा की जगह पूरे भारत में लंिक भाषा के रूप में आ सकती है। इस भाषा को सभी लोग समझ सकते हैं। यह बात उन्होंने तीन दिवसीय जल मंथन कार्यक्रम के दौरान कही। कार्यक्रम के दौरान वहां मौजूद श्रोताओं में से एक ने कहा कि मंच से बोलने वाले लोगों को हिंदी में बोलना चाहिए था जिससे यहां पर लोगों को समझ में आ सके। इस पर उमा भारती ने कहा कि कुछ लोग यहां पर अंग्रेजी को नहीं समझ सकते हैं तो कई लोग हॉल में ऐसे भी हैं जो खुद को हिंदी में संवाद नहीं कर सकते हैं। यह समस्या तभी दूर हो सकती है जब संस्कृत को हम एक लिंक भाषा के तौर पर अपना लें। सही मायनों में संस्कृत ही भारत की राष्ट्र भाषा है। पूरे भारत के हर गांव में आप देख सकते हैं कि दो-तीन लोगों को अंग्रेजी का कितना ज्ञान है। पूरे भारत में अंग्रेजी बोलने और समझने वाले लोगों से ज्यादा संख्या संस्कृत बोलने व समझने वालों की है। अंग्रेजी पर निर्भर होने के बावजूद अभी तक भारत में संस्कृत भारत की सबसे प्रसिद्घ और सामान्य तौर पर बोली जाने वाली भाषा है।
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।