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2014-12-22 14:11:24
बैकग्रांउड म्यूजिक के महारथी थे वसंत देसाई
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अपनी मधुर संगीत लहरियों से फिल्मी दुनिया को सजाने संवारने वाले महान संगीतकार वसंत देसाई के संगीतबद्ध गीतों की रोशनी फिल्म जगत की सतरंगी दुनिया को हमेशा रोशन करती रहेगी।

(India) 9 जून, 1912 में गोवा के कुदाल में जन्में वसंत देसाई को बचपन के दिनों से ही संगीत के प्रति रूचि थी। वर्ष 1929 में बसंत देसाई महराष्ट्र से कोल्हापुर आ गए। वर्ष 1930 में उन्हें प्रभात फिल्म्स की मूक फिल्म "खूनी खंजर" में अभिनय करने का मौका मिला। वर्ष 1932 में वसंत को "अयोध्या का राजा" में संगीतकार गोविंद राव टेंडे के सहायक के तौर पर काम करने का मौका मिला। इन सबके साथ ही उन्होंने इस फिल्म में एक गाना "जय जय राजाधिराज" गाया। इस बीच वसंत फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करते रहे। वर्ष 1934 में प्रदर्शित फिल्म "अमृत मंथन" में गाया उनका यह गीत "बरसन लगी" श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। इस बीच वसंत को यह महसूस हुआ कि पाश्र्व गायन के बजाए संगीतकार के रूप में उनका भविष्य ज्यादा सुरक्षित रहेगा। इसके बाद उन्होंने उस्ताद आलम खान और उस्ताद इनायत खान से संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी। लगभग चार वर्ष तक वसंत मराठी नाटकों में भी संगीत देते रहे। वर्ष 1942 में प्रदर्शित फिल्म "शोभा" के जरिए बतौर संगीतकार वसंत ने अपने सिने करियर की शुरूआत की, लेकिन फिल्म की असफलता से वह बतौर संगीतकार अपनी पहचान नहीं बना सके। वर्ष 1943 में वी शांताराम अपनी "शकुंतला" के लिए संगीतकार की तलाश कर रहे थे। वी शांताराम ने फिल्म के संगीत के लिए वसंत को चुना। इस फिल्म ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए। इसके बाद वसंत संगीतकार के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए। वर्ष 1957 में वसंत के संगीत निर्देशन में "दो आंखे बारह हाथ" का गीत "ऎ मालिक तेरे बंदे हम" आज भी श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय है। इस गीत की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पंजाब सरकार ने इस गीत को सभी विद्यालयों में प्रात:कालीन प्रार्थना सभा में शामिल कर लिया। वर्ष 1964 में प्रदर्शित फिल्म "यादें" वसंत के करियर की अहम फिल्म साबित हुई। इस फिल्म में वसंत को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि फिल्म के पात्र के निजी जिंदगी के संस्मरणो को बैकग्रांउड स्कोर के माध्यम से पेश करना। वसंत ने इस बात को एक चुनौती के रूप में लिया और सर्वश्रेष्ठ बैकग्राउंड संगीत देकर फिल्म को अमर बना दिया। इसी तरह वर्ष 1974 में फिल्म निर्माता गुलजार बिना किसी गानों के फिल्म "अचानक" का निर्माण कर रहे थे और वसंत से बैकग्राउंड म्यूजिक देने की पेशकश की और इस बार भी वसंत कसौटी पर खरे उतरे और फिल्म के लिये श्रेष्ठ पाश्र्व संगीत दिया। वसंत ने हिंदी फिल्मों के अलावा लगभग 20 मराठी फिल्मों के लिए भी संगीत दिया, जिसमें सभी फि ल्में सुपरहिट साबित हुई। 22 दिसंबर, 1975 को एच.एम.भी स्टूडियो से रिकॉर्डिग पूरी करने के बाद वह अपने घर पहुंचे। जैसे ही उन्होंने अपने अपार्टमेंट की लिफ्ट में कदम रखा किसी तकनीकी खराबी के कारण लिफ्ट उन पर गिर पड़ी और उन्हें कुचल डाला जिससे उनकी मौत हो गई।

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