(India)
हालांकी कोर्ट ने आबंटन रद्द नहीं किया था। आज कोर्ट इस बात पर फैसला देगा कि इन खदानों का भविष्य क्या होगा। सबकी नजरें इस बात पर टिकी है कि क्या सभी खदानों को बंद कर दिया जाएगा या फिर कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा। अपने पिछले फैसले में कोर्ट ने यह कहा था कि इस बात पर विचार किया जाएगा कि अगर इन सभी खदानों का लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है तो इसका क्या असर होगा। कोयला खदानों का आवंटन एक स्कीनिंग कमेटी के जरिये होता था। सरकारी और निजी कंपनियां अपने आवेदन इस कमेटी के पास भेजते थे जिसमें कोयला मंत्रालय के अधिकारी होते थे। कोर्ट ने इस फैसले से यूपीए के साथ-साथ एनडीए की सरकार को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकीं हैं कि कोयला खदान आबंटन पर सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला सुनाता है।
Author: Shiv Kishor
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