(India)
रिजर्व बैंक ने यह जानकारी देते हुए कहा कि परंपरागत रूप से अब भी ऐसे लोगों की पहली पसंद 500 रुपये का नोट ही है। बैंकिंग प्रणाली ने वित्त वर्ष 2013-14 के दौरान 500 रुपये के 2.52 लाख जाली नोट पकड़े। इससे पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 2.81 लाख का रहा था। हालांकि, इस दौरान 1,000 के जाली नोट का आंकड़ा बढ़कर 1.10 लाख पर पहुंच गया, जो इससे पिछले साल 98,459 था। केंद्रीय बैंक की सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान 100 रुपये के जाली नोटों का आंकड़ा 10,000 बढ़कर 1.18 लाख पर पहुंच गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2013-14 में 1,000 के जाली नोटों के आंकड़े में 11.8 प्रतिशत व 100 के नोट में 9.8 प्रतिशत का इजाफा हुआ। वहीं 500 के जाली नोट के आंकड़े में 10.3 फीसदी की कमी आई। हालांकि, इन आंकड़ों में राज्य पुलिस या अन्य विधि प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा पकड़े गए जाली नोटों को शामिल नहीं किया गया है। इस बीच, रिजर्व बैंक ने कहा कि जुलाई, 2013 से जून, 2014 के दौरान करेंसी नोटों की सुरक्षा, छपाई व वितरण पर खर्च में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। वित्त वर्ष 2013-14 में केंद्रीय बैंक ने इस मद पर 32.1 अरब रुपए खर्च किए जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में इसमें 28.7 रुपए खर्च किए गए थे।
Author: Shiv Kishor
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