वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सभी निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे विचाराधीन कैदियों की स्थिति का पता लगाने के लिए दो माह तक सप्ताह में एक बार अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली जेलों का दौरा करें। उच्चतम न्यायालय ने न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे उन सभी विचाराधीन कैदियों को रिहा कर दें, जो उन पर आरोपित अपराधों के लिए तय अधिकतम सजा की आधी अवधि काट चुके हैं। इसके अलावा शीर्ष कोर्ट ने सभी न्यायिक अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि वे एक अक्टूबर से जेलों का दौरा करना शुरू करें और उनके द्वारा रिहा किए गए कैदियों पर दो माह बाद रिपोर्ट जमा कराएं। वहीं, न्यायपालिका के लिए बजट संबंधी सहयोग की कमी पर उच्चतम न्यायालय ने चिंता जताई है और केंद्र केा कहा है कि वह अवसंरचना निर्माण के लिए और अधिक फंड का अनुदान दे।
Digital Desk: Shiv Kishor
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