(India)
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रवक्ता रवि कुमार गुप्ता ने बताया कि पूर्वाह्न करीब 11 बजकर 11 मिनट पर यहां से लगभग 100 किलोमीटर दूर व्हीलर द्वीप स्थित एकीकृत परीक्षण केंद्र (आईटीआर) के लॉंच पैड से एक मोबाइल लॉंचर के जरिए सतह से सतह पर मार करने वाली, ठोस प्रणोदक चालित, एकल चरण मिसाइल का परीक्षण किया गया । परीक्षण को पूर्ण रूप से सफल करार देते हुए गुप्ता ने कहा कि बैलिस्टिक मिसाइल को सेना की सामरिक बल कमान (एसएफसी) ने सेना के प्रशिक्षण अभ्यास के तहत दागा । उन्होंने कहा, ‘समूचा अभ्यास सही ढंग से हुआ और परीक्षण पूरी तरह सफल रहा ।’ एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘डीआरडीओ विकसित मध्यम रेंज की बैलैस्टिक मिसाइल उत्पादन लॉट से सैन्य बलों के नियमित प्रशिक्षण अभ्यास के तहत दागी गई ।’ अग्नि-1 मिसाइल में विशेष निर्देशन प्रणाली लगी है जो सुनिश्चित करती है कि लक्ष्य पर बेहद सटीक निशाना लगे । सैन्य बलों में पहले ही शामिल की जा चुकी मिसाइल रेंज, सटीक निशाने और घातकता के मामले में अपना शानदार प्रदर्शन साबित कर चुकी है । बारह टन वजनी और 15 मीटर लंबी अग्नि-1 मिसाइल अपने साथ 1,000 किलोग्राम तक का आयुध ले जा सकती है । अग्नि-1 का विकास डीआरडीओ की प्रमुख मिसाइल विकास प्रयोगशाला एडवांस्ड सिस्टम्स लैबोरेटरी ने रक्षा अनुसंधान विकास प्रयोगशाला और रक्षा केंद्र-इमारत के सहयोग से किया था और इसे भारत डायनामिक्स लिमिटेड, हैदराबाद ने एकीकृत किया था । इसका पिछला सफल अभ्यास परीक्षण 12 अप्रैल 2014 को व्हीलर द्वीप स्थित एकीकृत परीक्षण केंद्र से ही हुआ था । यह पहला परीक्षण था जिसे सूर्यास्त के बाद किया गया था ।
Digital Desk: Shiv Kishor
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