(India)
सीबीआई ने एयरसेल-मैक्सिस सौदा मामले में दाखिल आरोपपत्र पर विचार के दौरान अपनी दलीलें पेश करते हुए विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी से कहा कि आरोपी संख्या एक (दयानिधि मारन) ने अपनी कंपनियों को बेचने के लिए शिवशंकरन को बाध्य किया। उन्होंने (शिवशंकरन ने) अपनी तीन फर्म आरोपी संख्या छह, मलेशिया की मैक्सिस कम्युनिकेशन बरहाद को बेचे। सीबीआई ने 29 अगस्त को दयानिधि मारन, उनके भाई कलानिधि मारन और चार फर्म समेत छह अन्य के खिलाफ मामले में आरोपपत्र दाखिल किया था। आज दलील के दौरान वरिष्ठ लोक अभियोजक केके गोयल ने अदालत से कहा कि इस मामले में बिक्रीकर्ता (शिवशंकरन) पीड़ित थे क्योंकि दयानिधि मारन ने उनको कारोबार करने की इजाजत नहीं दी। उन्होंने कहा दयानिधि मारन उस वक्त दूरसंचार मंत्री थे। उन्होंने शिवशंकन की फर्मों से जुड़े अनेक मुद्दों को लंबित रखा और उनपर कोई फैसला नहीं किया गया। एजेंसी ने कहा कि इन तीन कंपनियों का गला घोंटा गया और वे अपना कारोबार करने में अक्षम थे। उसने कहा कि जैसे ही मैक्सिस ग्रुप ने शिवशंकरन की फर्म खरीदीं, दयानिधि मारन ने मलेशियाई कंपनी को अनुचित लाभ देते हुए तमाम लंबित मुद्दे निबटा दिए।
Digital Desk: Shiv Kishor
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