सीरियस फ्रॉड इनवेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) ने सोमवार को कहा कि सारदा ग्रुप के खिलाफ कंपनीज ऐक्ट के बजाय ज्यादा कड़े सेबी ऐक्ट के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। सेबी ऐक्ट में लंबी अवधि की सजा का प्रावधान है। सारदा डिपॉजिट स्कैम की जांच के दौरान एसएफआईओ ने पाया है कि ग्रुप नए इनवेस्टर्स से पेमेंट लेकर पहले से एनरोल मेंबर्स को भुगतान कर रहा था। पुराने मेंबर्स को इनवेस्टमेंट से मिलने वाली इनकम से भुगतान नहीं किया जा रहा था और यह एक पोंजी स्कीम थी। ग्रुप की कंपनियों को कंपनीज ऐक्ट, सेबी ऐक्ट और इंडियन पीनल कोड के कई प्रावधानों का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया है।
Digital Desk: Kamal
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