(India)
एक समारोह को संबोधित करते हुये उन्होंने कहा, हम विदेशी कर्ज पर अपनी निर्भरता को सीमित रख रहे हैं। यह महत्वपूर्ण है कि हम इसे इस तरह व्यवस्थित करें और अर्थव्यवस्था की सतर्क एवं सावधानी बरतते हुये देखभाल करें। रिजर्व बैंक ने जुलाई में विदेशी संस्थागत निवेशकों की ऋण सीमा को 5 अरब डॉलर बढ़ाकर 25 अरब डॉलर कर दिया। यह सीमा तब बढ़ाई गई जब विदेशी संस्थानों का निवेश 20 अरब डॉलर की सीमा के आसपास पहुंच गया। रिपोर्टों के अनुसार अतिरिक्त गुंजाइश नहीं बची है और तय सीमा करीब करीब पूरी हो चुकी है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की ऋणपत्रों में निवेश सीमा पहले ही 25 अरब डालर के करीब पहुंच चुकी है। इससे यह उम्मीद बंधी है कि निवेश सीमा में एक बार फिर वृद्धि हो सकती है। राजन ने कहा कि विदेशी मुद्रा प्रवाह से देश को फायदा पहुंचा है, लेकिन उन्होंने इस तरह के निवेश से सतर्क रहने की सलाह दी है क्योंकि यह निवेश सबसे बेहतर प्रतिफल की तरफ भागता है। उन्होंने कहा, इस विदेशी धन पर पूरी तरह विश्वास नहीं किया जा सकता। कोई न कोई समय आयेगा जब ये निवेशक अपने धन का वापस अपने देश में ही बेहतर इस्तेमाल पायेंगे और यह फिर वापस जाना चाहेंगे।
Digital Desk: Shiv Kishor
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