शायद ही कोई भारतीय मुस्लिम आतंकवाद में लिप्त हो :प्रणब मुखर्जी
(India) नार्वे की दो दिवसीय शासकीय यात्रा से पहले वहां के मीडिया को दिये साक्षात्कार में राष्ट्रपति ने कहा , ‘‘ 15 करोड आबादी में इक्का दुक्का हो सकता है लेकिन यह आयातित हैं, भारत में स्वदेशी आतंकी गतिविधि बिल्कुल नगण्य है और जब भी ऐसे आसार नजर आते हैं हम समुचित कदम उठाते हैं .’’ मुखर्जी ने कहा कि आतंकवाद को धर्म अथवा सीमाओं के प्रति कोई सम्मान नहीं है, उसकी कोई विचारधारा नहीं है अथवा उसकी एकमात्र विचारधारा है अत्यधिक तबाही और मानवीय मूल्यों की अनदेखी, राष्ट्रपति ने कहा , ‘‘ किसी को यह नहीं कहना चाहिये कि ‘ए’ का आतंकवाद अच्छा है और ‘बी ’ का आतंकवाद बुरा, अच्छा आतंकवादी , बुरा आतंकवादी, इस तरह का वर्गीकरण, मेरे लिहाज से निर्थक है ’’ उन्होंने कहा कि देश भाग्यशाली है क्योंकि 15 करोड़ मुस्लिमों में जो कि इंडोनेशिया के बाद दूसरी सबसे बडी आबादी है , शायद ही कोई आतंकवाद में संलिप्त है,
मुखर्जी ने कहा आतंकवाद से लडना होगा और उसके किसी भी रूप में संलिप्त नहीं होना चाहिये,. ‘‘यही एकमात्र तरीका इससे निपटने का है . ’’ भारत पाक सीमा और नियंत्रण रेखा पर हाल की हिंसा के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने कहा कि इसका उत्तर देने के लिये विदेश मंत्री सही व्यक्ति होंगे, इस मुद्दे पर तय नीति यह है कि हम अपने मित्रों का चयन कर सकते हैं लेकिन अपने पड़ोसियों का नहीं, राष्ट्रपति ने कहा , ‘‘दो बार विदेश मंत्री के तौर पर मैंने कहा था कि मैं अपने पडोसी के साथ सतत तनाव में नहीं रह सकता, मैं तनाव खत्म करना चाहूंगा . लेकिन इसके साथ ही यह भी मानना चाहिये कि इन देशों के विभाजन और आजादी के बाद से कई घटनाक्रम हुए हैं, ’’मुखर्जी ने कहा कि दो संस्थागत संधियां हैं.1972 का शिमला समझौता और 1999 की लाहौर घोषणा .जो हमें निलंबित मुद्दों को सुलझाने का तंत्र मुहैया करा सकती हैं .

Digital Desk: Shiv Kishor

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