'बाल मजदूरी की समस्या से लड़ने में दिल्ली सरकार गंभीर नहीं'
(DELHI, India) सत्यार्थी ने 1980 में बीबीए की स्थापना की थी। बीबीए ने कहा है कि दिल्ली के कम से कम 238 बाल मजूदर जिन्हें छुड़ाया गया है और जिनमें से कई बंधुआ मजदूर घोषित किए गए हैं, उनका बंधुआ मजदूरी (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के तहत पुनर्वास किया जाना बाकी है। एनजीओ के प्रमुख आरएस चौरसिया ने कहा, अधिनियम के तहत यह अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे 25,000 रुपए की एक पुनर्वास सह कल्याण निधि बनाकर छुड़ाए गए बच्चों का पुनर्वास सुनिश्चित करें जिसमें से 20,000 रुपए नियोक्ता जुर्माने के तौर पर भरेंगे और बाकी पैसे राज्य सरकार देगी। मई, 2013 में बाल मजदूरी से जुड़े जिला कार्य बल के प्रमुख को लिखे पत्र में बीबीए के राकेश सेंगर ने कहा था कि मामले को तत्काल हाथ में लेने और छुड़ाए गए सभी बच्चों का पुनर्वास करने की जरूरत है।

Digital Desk: Shiv Kishor

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