गुजरात के छोटा उदयपुर के तीन गांव सुरखेड़ा, सानदा और अंबल में इस तरह की प्रथा प्रचलित है। इन गांवों में आदिवासी लोग रहते हैं जो अपनी सदियों पुरानी परंपराओं को आज भी निभा रहे हैं। उनका मानना है कि ये रिवाज उनके पूर्वजों की याद दिलाती है। शादी को लेकर यह प्रथा लंबे समय से यहां चली आ रही है। इन तीन गांवों में ऐसी परंपरा है कि दूल्हे की बहन दूल्हा बनकर बारात लेकर अपनी भाभी लेने जाती है। सारे रीति रिवाजों में दूल्हे की बहन बतौर दूल्हा सारे कर्तव्य निभाती है। यहां तक कि शादी के दौरान दूल्हे की बहन अपनी भाभी की मांग में सिंदूर भी भरती है।
अगर दूल्हे की बहन न हो तो..?
अगर दूल्हे की बहन नहीं है तो ऐसी स्थिति में दूल्हे के परिवार से कोई कुंवारी लड़की दूल्हे की बहन के रूप में यह कार्य निभाती है। यहां दिलचस्प बात यह है कि दूल्हा बन-ठन कर तैयार रहता है लेकिन घोड़ी नहीं चढ़ता। घर पर ही दुल्हन का इंतजार करता है।
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