आसमान छूती महंगाई, अनाज-दूध जैसी जरूरी सामानों की किल्लत, दुकानों पर लंबी-लंबी लाइनें, डिपार्टमेंटल स्टोर्स पर लूटपाट, राजनीतिक लड़ाई-हिंसा, सरकार विरोधी प्रदर्शन और शहर-शहर दंगों की आग में झुलस रहे पड़ोसी देश श्रीलंका के हालात ने दुनियाभर के लोगों को चिंता में डाल दिया है. गलत आर्थिक फैसलों, सस्ते ब्याज, मुफ्त की स्कीमों और 50 बिलियन डॉलर के विदेशी कर्ज के जाल में फंसा श्रीलंका दिवालिया होने की कगार पर है. इस संकट की स्थिति में जनता की उम्मीदें खत्म हो रही हैं. लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर हैं. प्रधानमंत्री का इस्तीफा हो चुका है. सांसदों-मंत्रियों और शहरों के मेयर्स के घरों पर लगातार हमले हो रहे हैं. जगह-जगह हिंसक भीड़ पर सेना गोलीबारी कर रही है. 1948 में आजाद हुए श्रीलंका के सामने इस तरह का संकट पहली बार सामने आया है
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