क्यों संविधान पर साइन के लिए 2 महीने का किया इंतजार, अंबेडकर की ड्राफ्टिंग कमेटी पर संविधान सभा ने ही जताई थी आपत्ति!
(India) भारतीय गणतंत्र में संविधान ही सर्वोच्च है। इसके बावजूद संविधान पर उंगली उठाने वाले भी कम नहीं हैं। सबसे ताजा वाकया जुलाई, 2022 का है। केरल के एक मंत्री ने संविधान को लोकतंत्र विरोधी बता दिया तो बवाल मच गया।

संविधान की प्रस्तावना की आखिरी लाइन में लिखा है कि कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली ने 26 नवंबर, 1949 को संविधान का ड्राफ्ट पारित कर दिया था।

पारित होने का मतलब ये कि संविधान बनकर तैयार था और असैंबली के सभी सदस्यों को स्वीकार था। अब सिर्फ हस्ताक्षर होने बाकी थे।सिर्फ हस्ताक्षर के लिए दो महीने बाद की तारीख 24 जनवरी, 1950 तय की गई। 24 जनवरी को ही हस्ताक्षर भी हो गए, मगर संविधान के अमल में आने की तारीख 26 जनवरी, 1950 तय की गई।

Digital Desk: Administrator

DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।