बिना पूजा-पाठ शनि देव को प्रसन्न करना हो तो अपनाएं ये शास्त्रोक्त तरीके
(India) दरअसल, शनि देव जीवन में अच्छे कार्यों व सोच को अपनाने का सबक देते हैं। अच्छे काम और विचार ही धर्म पालन के लिए अहम है। इसलिए शास्त्रों में शनि की प्रसन्नता के लिए धार्मिक कर्मकांड के अलावा अच्छी बोली, अच्छा व्यवहार और अच्छा काम। ये तीन ऐसे तरीके बताए गए हैं, जिससे शनि देव बिना पाठ-पूजा या तंत्र-मंत्र के ही प्रसन्न हो जाते हैं। यहां तक कि नास्तिक यानी ईश्वर भक्ति से दूर रहने वाले लोग भी इन बातों का ध्यान रखकर शनिदेव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। सेवा - मान्यता है कि शनिदेव जरावस्था या बुढ़ापे के स्वामी है। इसलिए हमेशा माता-पिता, गुरु या बड़ों का सम्मान व सेवा करने वाले पर शनि की अपार कृपा होती है। इसके विपरीत वृद्ध माता-पिता या बुजुर्गों को दु:खी, अपमानित या उपेक्षित करने वाला शनि के कोप से बहुत पीड़ा पाता है।
दान- शनि भक्ति में दान का महत्व बताया गया है। दान उदार बनाकर घमण्ड को भी दूर रखता है, इसलिए यथाशक्ति शनि से जुड़ी सामग्रियों या किसी भी रूप में दान धर्म का पालन करें। अहं व विकारों से मुक्त इंसान से शनि प्रसन्न होते हैं। परोपकार- परोपकार धर्म का अहम अंग है। दूसरों के लिए दया भाव खास तौर पर गरीब व कमजोर लोगों के लिए शनि देव को प्रसन्न करता है। अन्न, धन या वस्त्र दान या शारीरिक रोग के साथ ही पीड़ा को दूर करने में सहायता शनि की अपार कृपा देने वाली होती है।
क्रोध का त्याग- शनि का स्वभाव क्रूर माना गया है, लेकिन वह बुराइयों को दण्डित करने के लिए है। इसीलिए शनि कृपा पाने व कोप से बचने के लिए क्रोध से दूर रहना ही बेहतर माना गया है।
सहिष्णुता या सहनशीलता- शनि का स्वरूप विकराल है। वहीं, शनि को कसैले या कड़वे पदार्थ जैसे सरसों का तेल आदि भी प्रिय माना गया है। इसके पीछे भी सूत्र यही है कि कटुता चाहे वह वचन या व्यवहार की हो, से दूर रहें व दूसरों के ऐसे ही बोल व बर्ताव को द्वेषता में न बदलें यानी सहनशील बनें।
बुरे काम न करें- चोरी, बेइमानी, जुआंं आदि से दूर रहेंगे तो शनि देव हमेशा प्रसन्न रहेंगे। शनि की साढ़ेसाती में मांसाहार से दूरी बना ली जाए तो बेहतर परिणाम मिलते हैं।

Digital Desk: Shiv Kishor

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