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ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को ग्रहों का राजा माना जाता है। सूर्य को आत्मा, पिता, आरोग्यता, आत्मविश्वास और सरकारी क्षेत्र का कारक माना जाता है। सूर्य का गोचरीय बदलाव भी सभी राशियों और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर प्रभाव डालता है।
सूर्य देव अपनी राशि सिंह को छोड़कर बुध ग्रह की दूसरी राशि कन्या में गोचर करने जा रहे हैं। ज्योतिष में सूर्य और बुध को एक-दूसरे का मित्र माना जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार, तात्कालिक स्थिति के आधार पर 17 सितंबर से 26 सितंबर तक दोनों ग्रहों के संबंधों में कुछ बदलाव रहेंगे। हालांकि, नैसर्गिक रूप से मित्र होने के कारण इनके बीच कोई बड़ी समस्या नहीं आएगी, लेकिन परिणामों का ग्राफ थोड़ा कम हो सकता है।
26 सितंबर के बाद जब बुध अपनी राशि बदलेगा, तब सूर्य और बुध के बीच संबंध और मजबूत हो सकते हैं। इसके बाद इनके परिणाम पहले की तुलना में और बेहतर होने की संभावना बताई जाती है।
सूर्य का कन्या राशि में गोचर: भारत पर प्रभाव
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्य के कन्या राशि में गोचर का असर देश और समाज से जुड़े कई क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। स्वतंत्र भारत की लग्न कुंडली के आधार पर सूर्य का गोचर पांचवें भाव में माना जा रहा है। इसलिए इसका प्रभाव युवाओं और विद्यार्थियों से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है। देश से जुड़े कुछ मामलों में असंतोष की स्थिति भी बन सकती है।
चंद्र कुंडली के आधार पर सूर्य तीसरे भाव में रहेंगे। ज्योतिष में सूर्य के लिए तीसरा भाव अनुकूल माना जाता है। इससे दूरसंचार से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना बताई जाती है।
इस दौरान पड़ोसी देशों के साथ बातचीत और संवाद की जरूरत पड़ सकती है। नेताओं के कुछ बयान भी चर्चा में आ सकते हैं। महिलाओं से जुड़े किसी मामले के भी चर्चा में रहने की संभावना जताई गई है।
सूर्य का यह गोचर तापमान में बढ़ोतरी और यातायात से जुड़े मामलों को भी प्रभावित कर सकता है।
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