जब भी मंदिर जाएं ध्यान रखें ये बातें, होगा पापों का नाश और मिलेगी लक्ष्मी
(India) शास्त्रों के अनुसार मंदिर की पवित्रता बनाए रखना सभी श्रद्धालुओं का कर्तव्य है। इसी वजह से कुछ नियम बताए गए हैं जिनका पालन करने पर महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति की धन संबंधी परेशानियां दूर हो सकती हैं, मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं। यहां जानिए मंदिर में प्रवेश करने से पूर्व किन बातों का ध्यान रखना चाहिए... जब भी मंदिर जाएं तो प्रवेश से पहले बाहर से मंदिर के शिखर के दर्शन करना चाहिए। शिखर के दर्शन से भी उतना ही पुण्य प्राप्त होता है, जितना मंदिर की प्रतिमा के दर्शन से प्राप्त होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि शिखर दर्शनम् पाप नाशम्। यानी शिखर के दर्शन से भी पापों का नाश होता है। मंदिर में प्रवेश करते समय घंटी अवश्य बजानी चाहिए। जिस प्रकार हम किसी के घर जाते समय डोर बेल बजाते हैं, ठीक उसी भाव से मंदिर की घंटी बजानी चाहिए। मंदिर की घंटी बजाने के बाद जो स्वर और कंपन पैदा होता है, वह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है। मंदिर में प्रवेश से पूर्व सबसे पहले अपने जूते-चप्पल इत्यादि बाहर ही निकाल दें, साथ ही मोजे भी। कुछ लोग मोजे सहित ही मंदिर में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे में मोजे की बदबू से मंदिर का वातावरण प्रदूषित होता है, अन्य लोगों को परेशानी होती है। अत: मोजे भी बाहर ही निकाल देना चाहिए। इससे पवित्रता और सफाई बनी रहेगी। जूते उतारने के पश्चात अपने हाथ-पैर पानी से धो लेना चाहिए। ताकि आपके हाथ-पैर पूर्णत: साफ और स्वच्छ हो जाए। ऐसा करने से धूल-मिट्टी आदि आपके पैरों के साथ मंदिर में नहीं जाएगी। मंदिर में अपने साथ किसी भी प्रकार कोई हथियार नहीं ले जाना चाहिए। वैसे तो आजकल यह व्यवस्था सभी मंदिरों में रहती है कि कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार के हथियार परिसर में न ले जा सके।
मंदिर में किसी भी परिस्थिति में अपने पैर या पीठ देवी-देवताओं की प्रतिमा के सामने की ओर करके नहीं बैठना चाहिए। यह असम्मान की भावना व्यक्त करता है। मंदिर में फर्श पर सभी श्रद्धालु मत्था टेंकते हैं, अत: फर्श को बिल्कुल गंदा नहीं करना चाहिए। ताकि अन्य श्रद्धालुओं के सिरों पर गंदगी ना लगे। भगवान की परिक्रमा घड़ी की सुई जिस दिशा में घुमती है, उसी के अनुसार करनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति ने कोई नशा जैसे शराब, सिगरेट, ड्रग्स इत्यादि ले रखा है तो उसे मंदिर में प्रवेश नहीं करना चाहिए। यह देवी-देवताओं के प्रति असम्मान की भावना दिखाता है। इसके साथ ही ऐसी हालत में प्रवेश करने पर मंदिर में मौजूद अन्य श्रद्धालुओं को भी परेशानियां हो सकती हैं। मंदिर में कहीं भी बैठे अपना मुख देवी-देवताओं की प्रतिमा की ओर रहना शुभ होता है।
मंदिर में भगवान के दर्शन करने के बाद किसी जरुरतमंद व्यक्ति को अपनी श्रद्धा के अनुसार दान अवश्य करें। यदि संभव हो सके तो गाय को हरी घास भी खिलाएं।

Digital Desk: Shiv Kishor

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