(India)
यह सेवा उपभोक्ताओं से जुड़ी जानकारियों की जांच कर यह पता लगाएगी कि यह फेसबुक पर इस्तेमाल की जानेवाली जानकारियों से मेल खाती है या नहीं। यदि इसे चोरी हुई उपभोक्ताओं के बारे में निजी जानकारियों का पता चलता है, तो यह आंकड़ों को एक प्रोग्राम में स्थानांतरित कर देती है, जो इसका कंप्यूटर की भाषा में विश्लेषण करता है। डेली मेल के अनुसार, स्वचालित प्रणाली इसके बाद फेसबुक डाटाबेस के आधार पर यह पता लगाती है कि कोई ई-मेल पता या पासवर्ड फेसबुक के लॉगइन सूचना से मेल खाती है या नहीं। फेसबुक के सुरक्षा इंजीनियर क्रिस लांग ने अपने ब्लॉग में लिखा, ‘निजी आंकड़ों, जैसे- ई-मेल पता और पासवर्ड की चोरी के व्यापक नतीजे हो सकते हैं, क्योंकि लोग कई बार एक ही पासवर्ड अलग-अलग वेबसाइटों पर इस्तेमाल करते हैं।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘हमने भविष्य में लोगों के फेसबुक खाते को सुरक्षित करने के लिए एक विशेष प्रणाली विकसित की है, जो उनके सार्वजनिक पोस्ट पर पूरी सक्रियता से नजर रखेगा और यदि यह पाया जाता है कि किसी फेसबुक उपभोक्ता से जुड़ी जानकारी इंटरनेट पर कहीं और नजर आ रही है तो हम उन्हें इस बारे में सूचित करेंगे।’
Digital Desk: Shiv Kishor
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