(DELHI, India)
जानकारी के अनुसार, सरकार ने विदेशी बैंक के तीन खाताधारकों के नाम आज सुप्रीम कोर्ट को बताए हैं। इनमें पहला नाम डाबर ग्रुप के प्रदीप बर्मन का है। दूसरा नाम राजकोट के कारोबारी पंकज चमनलाल का है। वहीं, तीसरा नाम गोवा के खनन कारोबारी राधा टिंब्लू का है। सुप्रीम कोर्ट अब मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करेगा और यह तय किया जाएगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाए। जिन तीन लोगों के नाम आज शीर्ष कोर्ट को बताए गए वे किसी राजनीतिक पार्टी से संबंध नहीं रखते हैं। ऐसा अनुमान पहले से लगाया जा रहा था। वहीं, केंद्र सरकार भविष्य में भी जांच के दायरे में आए लोगों के नामों का खुलासा कर सकती है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने शीर्ष कोर्ट से पहले कहा था कि दूसरे देशों के साथ संधि होने के कारण वह विदेशी बैंकों मे काला धन जमा करने वाले भारतीयों के नामों का खुलासा नहीं कर सकती। ऐसा करने पर संधियों का उल्लंघन होगा। कालाधन मुद्दे पर सरकार कोर्ट को यह भी बताएगी कि जिनका विदेशी बैंकों में खाता है, वो कालाधन है या नहीं। किसी विदेशी बैंक में खाता खोलना अवैध नहीं है, न ही इसके लिए आरबीआई की अनुमित लेना जरूरी है। नियमों के मुताबिक आरबीआई एक शख्स को एक साल में विदेशी खाते में सवा लाख डॉलर रुपये भेजने की इजाजत देता है। ऐसे में सरकार विदेशी खातों में रखे धन को कालेधन को साबित करेगी और इसकी पुष्टि होने के बाद ही सरकार इन नामों को सार्वजनिक कर सकती है। वहीं, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बीते दिनों संकेत दिया था कि पिछली संप्रग सरकार के एक मंत्री का नाम उन भारतीयों में शामिल हो सकता है जिन लोगों ने विदेशों में कालाधन जमा कर रखा है। एक न्यूज चैनल से बातचीत में जब उनसे जब यह पूछा गया कि आप यह कहकर संधि विशेष (गोपनीयता की शर्त) का उल्लंघन तो नहीं कर रहे हैं कि वह व्यक्ति मनमोहन सिंह की मंत्रिपरिषद का सदस्य हो सकता है, तो वित्त मंत्री ने कहा था कि मैं जानता हूं कि आपका इशारा किस ओर है, लेकिन कृपया उचित समय का इंतजार करें। यह सवाल पूछे जाने पर कि क्या वह इस बात से इनकार नहीं कर रहे हैं कि उनमें संप्रग सरकार का कोई मंत्री हो सकता है तो जेटली का संक्षिप्त जवाब था कि मैं न तो इकरार करता हूं न इनकार करता हूं।
Digital Desk: Shiv Kishor
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