(India)
एक उच्चस्तरीय समिति ने पाया था कि इन बैंक प्रमुखों के चयन की प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती गईं। सिंडिकेट बैंक के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एस के जैन की कथित तौर पर रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तारी और बर्खास्तगी के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक जैसे बैंकों के प्रमुखों की चयन प्रक्रिया की जांच कराई गई। वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा है कि भविष्य में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशकों तथा कार्यकारी निदेशकों के रिक्त पदों को नई चयन प्रक्रिया के जरिए भरा जाएगा। रिजर्व बैंक के गवर्नर की अगुवाई वाली समिति ने पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के कार्यकाल के दौरान बैंक आफ बड़ौदा, केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, ओरियंटल बैंक आफ कामर्स, यूनाइटेड बैंक और विजया बैंक के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशकों के नामों की सूची तय की थी। इस समिति में वित्तीय सेवा सचिव भी शामिल थे। समिति द्वारा चयनित नाम कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने अनुमोदन के लिए वित्त मंत्रालय को भेजे थे। लेकिन सरकार ने पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला किया है। इन रिक्तियों तथा सिंडिकेट बैंक सहित दो अन्य में खाली पदों को नई चयन प्रक्रिया के जरिये भरा जाएगा। इस प्रक्रिया में रिजर्व बैंक के गवर्नर या उनके द्वारा नामित कोई व्यक्ति शामिल होगा।
Digital Desk: Shiv Kishor
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