सरकार ने नौकरी से नहीं हटाने की मांग
सीएचए संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि उन्हें संविदाकर्मियों के रूप में शामिल किया जाए। वेतन में बढ़ोतरी करते हुए फिर से लगाया जाए। सीएचए के अभ्यर्थियों का कहना है कि 31 मार्च से हम सब की सेवाएं अचानक समाप्त कर दी गई। जबकि हम कोविड स्वास्थ्य सहायक पिछले सालों से लगातार कोरोना, मलेरिया, डेंगू व टीकाकरण में आमजन की सेवाएं करते आ रहे हैं। इसलिए सेवा निरस्तीकरण के आदेश रद्द कर सेवाओं को यथावत रखने की मांग जब तक पूरी नहीं होगी तब तक धरना जारी रहेगा। सीएचए अभ्यर्थी का कहना है कि कोविड के दौरान घर-घर सर्वे किया। कोविड सैंपलिंग में जुटे रहे। कोविड काल में अस्पतालों के दौरान भी ड्यूटी दी। कोविड टीकाकरण में बड़ा योगदान दिया। उल्लेखनीय है कि 1 अप्रैल से आमरण अनशन पर बैठे चार अभ्यर्थथियों की तबीयत खराब होने के बाद एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां डाॅक्टर्स की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है।
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