(India)
‘पीएच3सी’नाम वाला यह ग्रह अभी तक इसलिये नजर नहीं आया था कि सौर मंडल के अन्य ग्रहों के गुरूत्व प्रभाव के कारण सूर्य की कक्षा में इसकी परिक्रमा का समय अत्यधिक असंगत है। येल यूनीवर्सिटी के स्नातक और शोधपत्र के पहले लेखक जोसफ शिमिट ने कहा, ‘पृथ्वी पर ये प्रभाव बहुत छोटी अवधि के लिए हैं और केवल एक सैकंड या इसके आसपास के स्तर पर हैं।’ अनुसंधानकर्ताओं ने येल यूनीवर्सिटी और यूनीवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के समन्वय वाले प्लेनेट हंटर्स कार्यक्रम की मदद से इस नये ग्रह की खोज की है। येल में अनुसंधानकर्ताओं की अगुवाई करने वाले डेबरा फिशर ने कहा, ‘यह विज्ञान के मानवीय आयाम को और पुख्ता करता है। कंप्यूटर अनपेक्षित चीजें पता नहीं कर सकते लेकिन लोग कर सकते हैं।’ शोध का प्रकाशन द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में किया गया है।
Digital Desk: Shiv Kishor
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।