(Colonelganj, Gonda)
हालांकि कई जगह सांप्रदायिक सौहार्द के दृश्य भी देखने को मिले। शिया समुदाय ने पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत के मौके पर हाथों में झंडा तथा हुसैन की कब्र की प्रतिकृति लेकर मातम किया। उधर, सुन्नी समुदाय ने रोजा रखकर नमाज पढ़ी। आज के दिन, मुस्लिम समाज ने हुसैन को याद किया जो इराक के करबला में करीब 1400 साल पहले खलीफा यजीद के सैनिकों से लड़ते हुए शहीद हो गये थे। राष्ट्रीय राजधानी में, कई ताजिया जुलूस निकाले गये। इनमें से ज्यादातर जुलूस दक्षिण दिल्ली के जोरबाग में करबला तक गये। बीते एक पखवाड़े में दो समुदायों के बीच झड़पों के गवाह बने पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी क्षेत्र में, हिन्दू कार्यकर्ताओं ने मुहर्रम जुलूस का नेतृत्व किया और रास्ते में मुस्लिम भाइयों को जलपान कराया। रविवार से पैदा तनाव के बीच, बाहरी दिल्ली के बवाना क्षेत्र में भी जुलूस शांतिपूर्ण रहा लेकिन ये जुलूस दशकों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए जेजे कालोनी की सीमाओं तक ही सीमित रहे जबकि पहले जुलूस जेजे क्लस्टर से शुरू होकर बवाना क्षेत्र से गुजरते थे। वडोदरा में, वर्षों पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए, नागियरवडा हाकिम क्षेत्र में एक ताजिया जुलूस का स्वागत अंबरीश कुमार मंदिर के पुजारी ने किया। लेकिन इस मौके पर बरेली के सैदपुर गांव में दो समुदायों के सदस्यों के बीच झड़प और पथराव में सात लोग घायल हो गये। यह झड़प जुलूस मार्ग पर हुई। उत्तर प्रदेश के गोंडा और सीतापुर जिलों में जुलूस के दौरान बिजली के तारों के संपर्क में आने से 38 लोग घायल हो गये। जम्मू कश्मीर में श्रीनगर के कई भागों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐहतियाती कदम के तहत कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लगाए गए।
Author: JAN TV Editorial Team
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