(India)
राजन ने भारतीय आर्थिक संघ के वार्षिक सम्मेलन में यहां कहा, ‘कुछ राज्यों में कई मौकों पर ऋण माफी की गई। ये ऋण माफी योजनायें कितनी प्रभावी रहीं हैं? वास्तव में हमारे सामने जो भी अध्ययन आये हैं उनमें यही दिखा है कि इस तरह की योजनायें निष्प्रभावी रहीं हैं। वस्तुत: इन योजनाओं की वजह से बाद में किसानों को ऋण प्रवाह बाधित हुआ है।’ किसानों द्वारा आत्महत्या किये जाने के मुद्दे पर राजन ने कहा कि इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे का गहराई से अध्ययन किये जाने की जरूरत है। गवर्नर ने कहा, ‘एक सवाल यह है कि कृषि क्षेत्र में कर्ज बोझ की स्थिति से हम किस तरह निपट सकते हैं, इसके लिये हमारे सामने और क्या विकल्प हो सकते हैं। इसके साथ ही किसानों द्वारा आत्महत्या जैसे अति महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी गौर किया जाना चाहिये। आत्महत्याओं में रिणग्रस्तता कितनी वजह रही है, विशेषकर औपचारिक बैंकिंग तंत्र की दृष्टि से इसे देखने और दूसरी तरफ औपचारिक प्रणाली से उनका बोझ कितना हल्का हुआ है यह भी देखा जाना चाहिये।’
Digital Desk: Shiv Kishor
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