गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने देश में अल्पसंख्यकों की रक्षा के सरकार के संकल्प को दोहराते हुए धर्मांतरण पर सवाल उठाया और धर्मांतरण विरोधी कानून की आवश्यकता पर बहस की वकालत की। उन्होंने पूछा कि क्या धर्मांतरण में शामिल हुए बिना लोगों की सेवा नहीं की जा सकती? सिंह ने कहा, श्घर वापसी और धर्मांतरण के बारे में कभी कभी अफवाहें फैलती हैं और विवाद होते हैं। किसी भी प्रकार का धर्मांतरण होना ही क्यों चाहिए? माना जा रहा है कि उनका यह बयान परोक्ष रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के बयान का समर्थन करने वाला है। गौरतलब है कि पिछले दिनों मोहन भागवत ने कथित तौर पर कहा था कि मदर टेरेसा द्वारा गरीबों के लिए किए गए सेवा कार्यों का मकसद धर्म परिवर्तन भी था। राजनाथ सिंह ने राज्य अल्पसंख्यक आयोगों के एक सम्मेलन में कहा, अन्य देशों में अल्पसंख्यक समुदाय धर्मांतरण विरोधी कानून की मांग करते हैं। यहां हम केवल यह कह रहे हैं कि धर्मांतरण विरोधी कानून होना चाहिए। इस मुद्दे पर बहस होनी चाहिए।
Digital Desk: Kamal
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