भाजपा ने सोमवार को अपने मुख्यालय पर पार्टी का 35वां स्थापना दिवस मनाया, लेकिन इस समारोह में पार्टी के संस्थापक सदस्य वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी मौजूद नहीं थे। आडवाणी के निकटस्थ सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने 87 वर्षीय अपने वरिष्ठ नेता को समारोह में आमंत्रित ही नहीं किया। आडवाणी को न तो एसएमएस और न ही कोई निमंत्रण कॉल की गई। समारोह भाजपाध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में आयोजित किया गया। गौरतलब है कि हाल ही में बेंगलूरु में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी आडवाणी का संबोधन नहीं हुआ था। तब कहा जा रहा था कि संबोधन के लिए शाह ने आडवाणी से आग्रह किया था, पर वरिष्ठ नेता ने इसे ठुकरा दिया था।समारोह में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने मजबूत संगठन के जनसंघ से लेकर भाजपा को गढ़ने वाले सभी वरिष्ठ नेताओं को याद करते हुए कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे पार्टी में पद के बजाय विचार को मन में रखें। पद तो परिश्रम के पीछे पीछे आता है। सरकार बनने के बाद कार्यकर्ताओं को बढ़ी हुई जिम्मेदारियों का अहसास कराते हुए शाह ने विरोधियों के भूमि अधिग्रहण कानून समेत तमाम मुद्दों पर दुष्प्रचार व गलतबयानी का जोरदार विरोध करने को कहा है।भाजपा में बीते एक साल में आए बड़े बदलावों का असर उसके 35वें स्थापना दिवस समारोह पर साफ दिखा। इस दौरान भाजपा ने केंद्र में अपने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई और सदस्यता के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी भी बनी। साथ ही पीढ़ी बदलाव में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी व मुरली मनोहर जोशी धीरे धीरे हाशिए पर चले गए। पहले दोनों नेताओं के लिए मार्गदर्शक मंडल बना और उसके बाद बंगलुरु में हुई शाह की नई कार्यकारिणी की बैठक में दोनों नेता महज दर्शक भर रहे।
Digital Desk: Kamal
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