मुसलमानों के सशक्तीकरण, शिक्षा एवं सुरक्षा के बारे में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान को निराशाजनक बताते हुए आरएसएस के मुख्यपत्र पांचजन्य में कहा गया है कि तमाम बुद्धिजीविता के लब्बोलुआब के बावजूद वह एक साम्प्रदायिक मुस्लिम नेता का भाषण लगता है। हामिद अंसारी द्वारा सकारात्मक कदमों द्वारा मुसलमानों के सशक्तिकरण की जरूरत बताये जाने पर निशाना साधते हुए पांचजन्य में एक लेख में कहा गया है कि हाल में मजलिस ए मुशावरात के जलसे में हामिद अंसारी का भाषण निराश करने वाला था क्योंकि तमाम बुद्धिजीविता के लब्बोलुआब के बावजूद वह एक साम्प्रदायिक मुस्लिम नेता का भाषण लगता है। उपराष्ट्रपति से यह उम्मीद होना स्वाभाविक है कि वे किसी विशेष समुदाय की तरफदारी करने की बजाए सबके हित की बात करेंगे। लेकिन उनके भाषण में यह बात गायब थी।
Digital Desk: Kamal
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