पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने देश में कायम हो चुके गहरे ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक एवं अन्य लाइनों पर बहसों को गढ़े जाने के चलन पर गंभीर चिंता जताई। चिदंबरम ने कहा कि अब तक सिर्फ तीन मौके ऐसे आये जब भारत में गहरा ध्रुवीकरण कायम हुआ था। उन्होंने कहा कि ये तीन मौके थे-1947 में हुआ विभाजन, 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद और तीसरा 2015, जो अब तक के सबसे ध्रुवीकृत सालों में से एक रहा है। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, 2014 कटुता का साल था और मैंने सोचा कि 2015 में इस सब में कमी आएगी, लेकिन 2015 के अंत तक जाते-जाते पता चला कि यह सबसे ध्रुवीकृत साल रहा। आज यह साल गहरे तौर पर ध्रुवीकृत हो चुका है। भारतीय समाज कितना ध्रुवीकृत हो गया है। उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में कहा, किसी मुस्लिम, दलित या बेहद कम जमीन का मालिकाना हक रखने वाले किसी व्यक्ति से बात करें। उनमें बहुत असुरक्षा और भय का माहौल है कि आखिर हम किधर जा रहे हैं, गहरे तौर पर ध्रुवीकृत समाज की तरफ। हम चाहते हैं कि आप इस पर सोचें। चिदंबरम अपनी किताब स्टैंडिंग गार्ड-ए ईयर इन ऑपोजिशन के विमोचन के बाद बोल रहे थे। यह किताब 2015 में इंडियन एक्सप्रेस अखबार में छपे उनके स्तंभों का संकलन है। इस कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, जयराम रमेश, शशि थरूर, योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया, माकपा नेता सीताराम येचुरी और टी के रंगराजन एवं जानेमाने वकील मौजूद थे।
Digital Desk: Kamal
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