आर्ट ऑफ लिविंग पर जुर्माना लगाना जजिया कर जैसा-विहिप
(India)

विश्व हिंदू परिषद ने यमुना किनारे आर्ट ऑफ लिविंग के सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा पर्यावरण मुआवजे के रूप में पांच करोड़ रूपये का जुर्माना लगाये जाने को जजिया कर करार देते हुए अधिकरण से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। विहिप के संयुक्त सचिव सुरेंद्र जैन ने एक बयान में कहा कि बिना किसी अपराध के एक धार्मिक व्यक्ति पर जुर्माना लगाना जजिया कर की याद दिलाता है जो मुगल शासन के दौरान लिया जाता था। जैन ने एनजीटी से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। गौरतलब है कि आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ने गुरुवार को विद्रोही रूख अख्तियार करते हुये कहा था कि एनजीटी द्वारा उनके संस्थान पर यमुना खादर में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर पर्यावरण उल्लंघन के लिए जो जुर्माना लगाया है उसे चुकाने की बजाय वह जेल जाना पसंद करेंगे। रविशंकर ने कहा, हमने कुछ भी गलत नहीं किया है। हम निष्कलंक हैं और ऐसे ही रहेंगे। हम जेल चले जांएगे लेकिन जुर्माना नहीं चुकाएंगे।

Digital Desk: Kamal

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