एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार राष्ट्रपति भवन में शाही डिनर के मेन्यू में यह शामिल नहीं है। इसके पीछे का कारण है- बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल दोनों ने ही 500 ग्राम से कम वजन वाले (जुवेनाइल) हिलसा की खरीद-बिक्री को बंद करने के लिए कानूनी प्रावधान बनाया है। मार्च और अप्रैल के दौरान जुवेनाइल हिलसा की संख्या अधिक होती है और इनकी प्रजाति के लिए इनका जीवन महत्वपूर्ण है।
1996 में अवामी लीग दोबारा सत्ता में लौटी और शेख हसीना बांग्लादेश की पीएम बनीं। इसी साल गंगा जल संधि पर हस्ताक्षर से पहले हसीना ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु को हिलसा भेजा था। दिलचस्प बात यह है कि तीस्ता जल बंटवारे मुद्दे पर समझौते के बीच अब 21 साल बाद जब वे वापस दिल्ली आयी हैं तब यहां से हिलसा नदारद है।
सूत्रों के अनुसार मेन्यू में- भेटकी पटुरी (भेटकी मछली को केले के पत्ते में लपेट कर) चिंगरी माछेर मलाइकरी (नारियल के साथ प्रॉन करी) और चितल माछेर मुट्या शामिल है।बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीब रहमान की हत्या के बाद शेख हसीना छह साल तक (1975-1981) भारत में रहीं। उस समय इंदिरा कैबिनेट के सदस्य प्रणब मुखर्जी और उनका परिवार लगातार शेख हसीना के संपर्क में था। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की पत्नी शुभ्रा मुखर्जी बुरे दिनों में शेख हसीना की सबसे खास सहेली थीं। आपको बता दें कि 2015 में जब शुभ्रा मुखर्जी का देहांत हुआ तो उन्हें श्रद्धांजलि देने खुद शेख हसीना भारत आईं।
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