(DELHI, DELHI)
जीएसटी काउंसिल ने टैक्स की दरें तय कर दीं हैं। नए टैक्स सिस्टम को देश में 1 जुलाई से लागू किया जाएगा। एक तरफ इंडस्ट्री और मार्केट एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि यह देश को सिंगल मार्केट में तब्दील कर देगा तो दूसरी तरफ आम आदमी इस बात से आशंकित है कि कहीं जीएसटी के बाद महंगाई तो नहीं बढ़ जाएगी। इतिहास पर नजर डालें तो आम आदमी की चिंता जायज भी है। जिन देशों ने जीएसटी या इस तरह का टैक्स सिस्टम लागू किया वहां महंगाई में वृद्धि दर्ज की गई। इनमें सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं। आरबाई की ओर से जारी की गई स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2000 में जब ऑस्ट्रेलिया ने जीएसटी लागू किया तो बदलाव के दौर में वहां महंगाई काफी बढ़ गई। ऑस्ट्रेलिया में इसे लागू करने में 25 साल लग गए, वहां इसकी प्लानिंग 1975 से ही हो रही थी। कई टैक्सों को खत्म कर वस्तुओं और सेवाओं पर 10 पर्सेंट टैक्स तय किया गया था। न्यूजीलैंड का भी अनुभव ऐसा ही है। यहां भी जीएसटी लागू करने पर महंगाई दर बढ़ी, लेकिन एक साल में स्थिति सामान्य हो गई। कनाडा में भी जीएसटी ने कीमतों पर प्रभाव डाला। हालांकि, मलयेशिया उन देशों में शामिल है जिन्होंने इस रिस्क को कम करने में सफलता पाई। घरेलू व्यापार और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने सक्रियता से हस्तक्षेप करते हुए कीमतों को स्थिर रखा था।
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