फरवरी महीने लॉ कमीशन के चेयरमैन जस्टिस बीएस चौहान ने कहा था, 'हमने जांच में यह पाया है कि संविधान के अनुच्छेद-12 के तहत बीसीसीआई बतौर 'राज्य' के तहत शामिल किए जाने के लिए बहुत ही ज्यादा योग्य है। ऐसे में लॉ कमीशन ने अपनी सिफारिश में बीसीसीआई को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए इसे निजी से 'सार्वजनिक संस्था' में बदलने या इसे कम से कम राइट-टू-इनफॉर्मेश कानून के तहत लाने की मांग की है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2016 में अपने एक फैसले में लॉ कमीशन से बीसीसीआई को आरटीआई के तहत लाने के लिए कानूनी जरुरतों की पड़ताल करने को कहा था। इसके अलावा पिछले साल जून महीने में केंद्रीय सूचना आयोग यानी सीआईसी ने बोर्ड के सूचना के अधिकार यानी आरटीआई से बाहर होने पर प्रधानमंत्री कार्यालय से ही जवाब मांग लिया था। सीआईसी ने एक याचिका में फैसला सुनाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ साथ खेल और कानून मंत्रालय से भी जवाब मांगा था.
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