कुछ नगर निगमों में भाजपा ने अकेले दम पर चुनाव लड़ा है, जबकि कहीं कांग्रेस और शरद पवार गुट ने मिलकर मोर्चा संभाला है। वहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना कई शहरों में बिना किसी औपचारिक गठबंधन के मैदान में उतरी है। दूसरी ओर, कुछ जगहों पर ऐसे दल भी साथ आए हैं जो राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर एक-दूसरे के कट्टर विरोधी माने जाते हैं। इससे स्थानीय राजनीति में नए समीकरण और दिलचस्प मुकाबले देखने को मिले हैं।
पश्चिम महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, विदर्भ और कोंकण जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में दलगत रणनीति अलग रही है। कहीं स्थानीय मुद्दों के चलते गठबंधन टूटे, तो कहीं जीत की संभावनाओं को देखते हुए नए सियासी साथी चुने गए। इन चुनावों के नतीजे न सिर्फ नगर निगमों की सत्ता तय करेंगे, बल्कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा और पार्टियों की रणनीति पर भी असर डालेंगे।
Author: JAN TV Editorial Team
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