राजस्थान हाईकोर्ट ने झबरा राम को जमानत दे दी थी। इस फैसले को रद्द कराने के लिए जांच एजेंसी सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।
झबरा राम पर खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने और सेना से जुड़ी गोपनीय जानकारी सीमा पार बैठे अपने हैंडलर्स तक पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने कथित प्रक्रियागत अनियमितता को जमानत देने का पर्याप्त आधार मान लिया, जबकि अपराधों की गंभीरता और जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों पर उचित ध्यान नहीं दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई को हाईकोर्ट की ओर से दी गई जमानत रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि मामले के गुण-दोष पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी नहीं की गई है।
झबरा राम की गिरफ्तारी
राजस्थान CID इंटेलिजेंस ने झबरा राम को 30 जनवरी को जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। उस पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आरोप लगाए गए हैं।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर सेना की गतिविधियों, मूवमेंट और संवेदनशील ठिकानों के फोटो व वीडियो बनाकर सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के माध्यम से पाकिस्तान में बैठे अपने संपर्कों तक पहुंचाने की बात बताई थी।
आरोपी झबरा राम प्रत्येक फोटो और वीडियो के बदले पैसे लेता था। आरोप है कि उसे हर महीने 2,000 से 3,000 रुपये तक की राशि UPI, PhonePe और Google Pay के माध्यम से मिलती थी।
Digital Desk: Neha Sharma
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