राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में कांग्रेस का पारंपरिक सामाजिक आधार भी लगातार कमजोर होता गया है। पार्टी अब तक किसी नए सामाजिक वर्ग को जोड़ने के लिए स्पष्ट रणनीति नहीं बना पाई है। कई नेताओं का कहना है कि लोकसभा चुनाव 2024 के बाद दलित और पिछड़े वर्गों में जो संभावित समर्थन का माहौल बना था, उसे मजबूत करने के लिए संगठनात्मक स्तर पर कोई बड़ा अभियान नहीं चलाया गया।
इस बीच भाजपा, समाजवादी पार्टी और बसपा जैसे दल लगातार रैलियों, बैठकों और संगठन विस्तार के कार्यक्रमों के जरिए चुनावी जमीन तैयार कर रहे हैं। ऐसे माहौल में कांग्रेस की सीमित सक्रियता राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी जल्द ही संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर अभियान शुरू नहीं करती, तो आगामी विधानसभा चुनाव में उसकी चुनौती और कठिन हो सकती है।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।