विशेषज्ञों के मुताबिक हमलावर अक्सर किसी जरूरी सूचना के नाम पर फर्जी APK फाइल भेजते हैं, जैसे बिजली बिल, चालान या शादी का ई-कार्ड। यदि कोई यूजर गलती से इस एप को इंस्टॉल कर देता है और मैसेज पढ़ने की अनुमति दे देता है, तो यह बैकग्राउंड में काम करने लगता है। इसके बाद बैंक या यूपीआई से आने वाले ओटीपी को इंटरसेप्ट करके हैकर तक पहुंचा दिया जाता है, जिससे वे खाते में लॉग-इन करने की कोशिश कर सकते हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के हमलों से बचने के लिए अनजान लिंक या एप डाउनलोड करने से बचना बेहद जरूरी है। केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही एप इंस्टॉल करें और फोन में आने वाली संदिग्ध परमिशन रिक्वेस्ट को ध्यान से जांचें। शोधकर्ताओं ने इस खतरे की जानकारी संबंधित बैंकों और एजेंसियों के साथ साझा की है ताकि सुरक्षा उपाय और मजबूत किए जा सकें।
Author: JAN TV Editorial Team
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