कन्नड़ और संस्कृति मंत्री Shivraj Tangadagi ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि अगर Bharatiya Janata Party सहयोग करती है तो सरकार इस पर ठोस कदम उठा सकती है। उनका मानना है कि डीजे संस्कृति कई सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर रही है, इसलिए इसे नियंत्रित करना जरूरी है।
वहीं, भाजपा विधायक S. N. Channabasappa ने इस मुद्दे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह व्यक्तिगत पसंद का मामला है और विधानसभा को इस पर समय नहीं देना चाहिए। इस बीच आईटी मंत्री Priyank Kharge ने सुझाव दिया कि पूरी तरह बैन के बजाय गानों की प्रकृति और ध्वनि स्तर पर नियंत्रण बेहतर विकल्प हो सकता है। इस बहस ने राज्य में ध्वनि प्रदूषण और सांस्कृतिक मूल्यों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
Author: JAN TV Editorial Team
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