संगम के पदाधिकारियों के अनुसार, यह प्रस्ताव पहली बार 2008 में सामने आया था और 2018 में इसे लेकर एक औपचारिक प्रस्ताव भी पारित किया गया था। उनका कहना है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में रह रहे तमिल समुदाय की पहचान और सम्मान के लिए यह कदम जरूरी है।
संगम के उपाध्यक्ष एडवोकेट सेल्वराज महेंद्रन ने बताया कि इलाके में पहले से ही तिरुवल्लुवर के नाम पर एक सड़क मौजूद है और अब मेट्रो स्टेशन का नाम भी उसी दिशा में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मांग को लेकर दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार दोनों को कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं।
स्थानीय निवासियों का भी मानना है कि स्टेशन का नाम तिरुवल्लुवर के नाम पर रखने से उन्हें गर्व महसूस होगा और इससे शहर की सांस्कृतिक विविधता को भी पहचान मिलेगी। उनका कहना है कि मेट्रो स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थलों के नाम स्थानीय समुदाय की पहचान को दर्शाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
तिरुवल्लुवर, जो नैतिकता, राजनीति और अर्थशास्त्र पर अपने प्रसिद्ध दोहों के लिए जाने जाते हैं, तमिल संस्कृति के सबसे सम्मानित व्यक्तित्वों में से एक हैं।
तमिलनाडु में चुनावी माहौल के बीच इस मांग को फिर से जोर-शोर से उठाया जा रहा है, जिससे यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
अब देखना होगा कि क्या यह लंबे समय से लंबित मांग इस बार सरकार के स्तर पर कोई ठोस निर्णय हासिल कर पाती है या फिर यह मुद्दा आगे भी लंबित ही रहता है।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।