केजरीवाल ने साफ कहा कि वे न तो अदालत में पेश होंगे और न ही कोई दलील रखेंगे। उन्होंने इसे अपनी अंतरआत्मा की आवाज पर लिया गया निर्णय बताया।
इससे पहले 20 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को मामले से अलग करने की मांग वाली केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी थी। जज ने कहा था कि वे इस केस की सुनवाई जारी रखेंगी और खुद को अलग नहीं करेंगी, क्योंकि ऐसा करने से गलत संदेश जाएगा कि दबाव बनाकर जज को हटाया जा सकता है।
दरअसल, केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा पर पक्षपात और हितों के टकराव के आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि जज आरएसएस से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल रही हैं और उनके बच्चे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करते हैं।
15 अप्रैल को दाखिल हलफनामे में भी केजरीवाल ने यही आरोप दोहराए थे। इससे पहले 13 अप्रैल की सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था कि मामले में निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
केजरीवाल का कहना है कि 9 मार्च को हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बहुत कम समय में खारिज कर दिया, जिससे उन्हें पक्षपात का संदेह हुआ। उन्होंने इस संबंध में चीफ जस्टिस को पत्र भी लिखा था, लेकिन उसे भी खारिज कर दिया गया।
Author: JAN TV Editorial Team
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