करीब 1,360 वर्ग किलोमीटर में फैला यह टाइगर रिजर्व भारत के सबसे सफल बाघ संरक्षण स्थलों में गिना जाता है, जहां 260 से अधिक बाघ निवास करते हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, इस सफलता के पीछे मुख्य भूमिका बाघिनों की है, जो न केवल अपने शावकों का पालन-पोषण करती हैं बल्कि उन्हें जंगल में जीवित रहने की कला भी सिखाती हैं।
पार्क वार्डन बिंदर पाल सिंह ने बताया कि बाघिन अपने बच्चों की सुरक्षा और भोजन की व्यवस्था में पूरी तरह समर्पित रहती है और एक मां की तरह उनका पालन-पोषण करती है।
वन्यजीव प्रेमी संजय छिमवाल का कहना है कि कॉर्बेट में बाघों की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण स्वस्थ बाघिनों की अच्छी आबादी है, जो प्रजनन और प्रजाति के विस्तार में अहम भूमिका निभा रही हैं।
कॉर्बेट की बाघिनें इस बात का प्रतीक हैं कि प्रकृति में मां की ममता केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि जीवन और प्रजातियों के अस्तित्व की सबसे मजबूत नींव भी है।
Author: JAN TV Editorial Team
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