जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की पीठ ने छह अप्रैल से हिंदू, मुस्लिम और जैन संगठनों की ओर से दायर पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर सुनवाई की। मंगलवार को सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
यह विवाद Bhojshala Complex की धार्मिक प्रकृति को लेकर है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित इस स्मारक को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि यह माता वाग्देवी या सरस्वती का प्राचीन मंदिर था, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। वहीं जैन संगठनों ने भी इस ढांचे को जैन मंदिर होने का दावा किया है।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने धार्मिक मान्यताओं, ऐतिहासिक घटनाओं और कानूनी प्रावधानों से जुड़े कई जटिल पहलुओं पर बहस हुई। मामले में हजारों दस्तावेज भी पेश किए गए।
Archaeological Survey of India की 2000 से अधिक पन्नों की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि इस स्थल पर पहले परमार राजाओं के काल का एक विशाल ढांचा मौजूद था और वर्तमान संरचना के निर्माण में मंदिरों के हिस्सों का पुनः उपयोग किया गया था।
Author: JAN TV Editorial Team
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