व्यापारियों का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए ईंधन की खपत घटाने और सोना खरीदने से बचने की अपील का सीधा असर जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर पर पड़ सकता है। उनका मानना है कि यदि लोग सोने की खरीद कम कर देते हैं, तो इससे कारोबार में भारी नुकसान और बड़ी संख्या में कारीगरों के रोजगार पर संकट खड़ा हो सकता है।
ज्वेलरी कारोबारियों ने कहा कि भारत में सोने और चांदी के आभूषण सिर्फ निवेश नहीं बल्कि सामाजिक परंपराओं और रीति-रिवाजों से भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में खरीदारी में कमी आने से बाजार पर व्यापक असर पड़ सकता है।
इस बीच All India Jewellers & Goldsmith Federation ने भी देश की गोल्ड मोबिलाइजेशन व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। संगठन का कहना है कि घरेलू स्तर पर सोने के पुनर्चक्रण और गोल्ड मोबिलाइजेशन को बढ़ावा देना विदेशी मुद्रा संकट से निपटने का बेहतर तरीका हो सकता है।
फेडरेशन ने चेतावनी दी कि सोने की खरीद टालने की अपील से ज्वेलरी उद्योग को भारी नुकसान हो सकता है और इस क्षेत्र से जुड़े करीब 3.5 करोड़ लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
Author: JAN TV Editorial Team
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