सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई 24.71 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो पिछले महीने 1.05 प्रतिशत थी। वहीं कच्चे पेट्रोलियम में महंगाई 88.06 प्रतिशत दर्ज की गई, जो मार्च में 51.5 प्रतिशत थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़ोतरी पश्चिम एशिया संकट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े व्यवधानों का असर है, जहां से भारत को बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात किया जाता है।
खाद्य वस्तुओं में महंगाई 1.98 प्रतिशत रही, जबकि गैर-खाद्य वस्तुओं में यह बढ़कर 12.18 प्रतिशत हो गई। मंत्रालय के अनुसार, यह वृद्धि मुख्य रूप से खनिज तेल, कच्चे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और बेसिक मेटल्स की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई है।
ईंधन श्रेणी में एलपीजी की महंगाई 10.92 प्रतिशत रही, जबकि पेट्रोल में यह 32.40 प्रतिशत और डीजल में 25.19 प्रतिशत दर्ज की गई।
हालांकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद सरकार ने घरेलू स्तर पर पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतों को स्थिर रखा है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर तत्काल असर कम किया जा सके।
Author: JAN TV Editorial Team
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