वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव Darpan Jain ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ एफटीए वार्ता के दौरान ऑटोमोबाइल सेक्टर सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में से एक रहा, क्योंकि भारत में आयात शुल्क काफी अधिक है। हालांकि, भारत ने इन चुनौतियों को अवसर में बदलने की दिशा में काम किया है।
उन्होंने उद्योग संगठन FICCI के एक सम्मेलन में कहा कि भारत ने यूरोपीय संघ को रियायतें देने के साथ-साथ घरेलू उद्योग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोटा-आधारित और दीर्घकालिक समाधान तैयार किए हैं।
जैन ने कहा कि इस समझौते से भारत में अधिक निवेश आएगा, देश में वाहनों का उत्पादन बढ़ेगा और तीसरे देशों को निर्यात में भी तेजी आएगी। इसके जरिए भारत, यूरोपीय संघ की वैश्विक मूल्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
एफटीए के तहत भारत ने आयातित यूरोपीय कारों पर लगने वाले 110 प्रतिशत शुल्क को धीरे-धीरे घटाकर 10 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है। यह रियायत हर साल 2.5 लाख वाहनों पर लागू होगी। माना जा रहा है कि इससे यूरोपीय कारों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
उन्होंने सामाजिक सुरक्षा समझौतों (SSA) का भी जिक्र किया और बताया कि भारत का यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों में से 14 देशों के साथ पहले से ही ऐसा समझौता है। सात अन्य देशों के साथ बातचीत जारी है, जबकि छह और देशों के साथ समझौते की योजना बनाई जा रही है।
इन समझौतों से यूरोपीय देशों में सीमित अवधि के लिए काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को दोहरी सामाजिक सुरक्षा राशि जमा करने से राहत मिलती है।
जैन ने कहा कि यूरोपीय संघ के 70 देशों के साथ 40 से अधिक एफटीए हैं, जिनका फायदा भारतीय निर्यातकों को भी मिल सकता है।
Author: JAN TV Editorial Team
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