यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या बिजली आधारित इंजन की जगह हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक का उपयोग करेगी। हाइड्रोजन से उत्पन्न ऊर्जा के जरिए ट्रेन को चलाया जाएगा, जिससे प्रदूषण कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
ट्रेन की कुल विद्युत क्षमता 1,200 किलोवाट बताई गई है। यह ‘डिस्ट्रीब्यूटेड पावर रोलिंग स्टॉक’ (डीपीआरएस) तकनीक पर आधारित होगी, जिसमें शक्ति किसी एक इंजन में केंद्रित रहने के बजाय पूरी ट्रेन में वितरित रहती है।
रेल मंत्रालय की यह मंजूरी ‘रिसर्च डिज़ाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइज़ेशन’ (Research Designs and Standards Organisation) से तकनीकी स्वीकृति और रेल सुरक्षा आयुक्त द्वारा सुरक्षा परीक्षण पूरे होने के बाद दी गई है।
मंत्रालय ने उत्तरी रेलवे को निर्देश दिया है कि ट्रेन संचालन से पहले सभी सुरक्षा मानकों और रखरखाव संबंधी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों के अनुसार मंजूरी मिलने के बावजूद ट्रेन का संचालन तुरंत शुरू नहीं होगा, क्योंकि अभी कई तकनीकी और अनुपालन प्रक्रियाएं पूरी की जानी बाकी हैं।
यह परियोजना भारतीय रेलवे की हरित और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।